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वानप्रस्थ में छाईं अमर गायिकाएं, देविका रानी से लता मंगेशकर तक

बोलती  भारतीय फिल्मों में गायन के करीबन 90 वर्ष के इतिहास में यूं तो अनेक गायिकाएं आईं और गईं पर लगभग एक दर्जन गायिकाएं आज भी अपने गानों के जरिए जिंदा हैं और श्रोता, खास तौर पर वरिष्ठ नागरिक, जब भी उन्हे सुनते हैं तो वाह वाह कहते हुए अक्सर झूम उठते हैं और साथ में गाना गुनगुनाने लगते हैं।    कुछ इसी तरह का माहौल हिसार की वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब द्वारा आयोजित वेब गोष्ठी में देखने को मिला जब सुप्रसिद्ध गायिका डॉ दीपशिखा पाठक ने इन गायिकाओं के गीतों के एक से बढ़कर एक मोती बिखेरे। उन्होंने बताया कि इन गायिकाओं ने लगभग एक लाख गाने भारतीय फिल्मों को दिए हैं जिन में से 30,000 तो अकेले लता मंगेशकर ने अपने 70 वर्ष से अधिक के गायन काल में दिए हैं। उन्हीं की बहन आशा भोंसले ने करीबन 20,000 और नूरजहां ने 18,000 गाने गाकर अपनी आवाज़ को अमर कर दिया है।
 इन सभी गायिकाओं को असली प्यार व सम्मान तो उनके करोड़ों रसिकों से मिला पर शासकीय पुरूस्कार व सम्मान भी कम नहीं थे। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। देविका रानी, कानन देवी व आशा भोंसले को फिल्म जगत का सर्वोच्च दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिला। शमशाद बेगम को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।    इन सभी आवाज़ों की एक झलक डॉ दीपशिखा ने तीन घंटे चले कार्यक्रम में दी जिसका आयोजन वर्ष 2020 की संगीतमय विदाई और वर्ष 2021 के सुरीले आगमन के लिए मंगल कामना समारोह के नाम से किया गया था।  डॉ दीपशिखा ने हर गायिका की आवाज़ में एक वीडियो क्लिप चलाया और साथ में उसी गायिका का गाया एक अन्य गीत अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर समा बांध दिया। साथ ही उनके जीवन और गायन से जुड़े कितने ही किस्से भी सुनाए। अक्सर पुरानी गायिकाएं गाती भी थीं और फिल्मों में एक्टिंग भी करती थीं ।     डॉ दीपशिखा ने शुरुआत सबसे पुरानी आवाज़ देविका रानी के गीत से की। देविका रानी का गीत था, 'नौनिहालो जागो’और दीपशिखा ने अछूत कन्या फिल्म का ‘उड़ी हवा में जाती है गाती चिड़िया ये राग’ प्रस्तुत किया।    फिर खुर्शीद का 'पंछी बावरा चांद से प्रीत लगाए' गीत गाया। खुर्शीद मीना कुमारी की बहन थी।
 रविन्द्र संगीत को विश्व पटल पर ले जाने वाली बांग्ला फिल्मों की सुपरस्टार कानन देवी की फिल्म  'तूफ़ान मेल ‘ के विडीओ से श्रोताओं की बचपन की यादें ताज़ा हो गईं और फिर दीपशिखा ने उनके गीत ‘ए चाँद छुप ना जाना’ की प्रस्तुति दी।    और भी बानगी देखिए:   नूरजहां के गीत 'आजा मेरी बरबाद मुहब्बत के सहारे' का वीडियो दिखाकर  दीपशिखा ने गाया ‘आवाज़ दे कहां है, दुनिया मेरी जवाँ है’.सुरैया का गीत 'तेरे नैनों ने चोरी किया, मेरा छोटा सा जिया' और दूसरा था गालिब की ग़ज़ल 'नुक्ताचिं है गमे दिल, उसको सुनाए न बने'।   शमशाद बेगम ने गाया, 'लेकर पहला पहला प्यार' और दीपशिखा ने फिर उन्हीं का गीत पेश किया 'सैंया दिल में आना रे, आके फिर न जाना रे, छम छमाछम, छम'।
 बंगाल के बाउल संगीत से प्रभावित गीता दत्त का प्रस्तुत गीत था, 'तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले' और अपनी प्रस्तुति के लिए दीपशिखा ने उनका जो गीत चुना वह था,'ए दिल मुझे बता दे, तू किस पे आ गया है'।  कुरुक्षेत्र में जन्मी सुधा मल्होत्रा का पहला गीत जिसे उन्होंने खुद ही संगीतबद्ध भी किया था, ‘ तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको,मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है' सुनाया और खुद ‘ सलामे हसरत क़बूल कर लो' ग़ज़ल गाई।   अगली पादान पर आशा भोंसले थी जिनका पहला गीत था,'आइए मेहरबां, बैठिए जानेजां, शौक से लीजिए, इश्क के इम्तिहां'। अपनी प्रस्तुति के लिए दीपशिखा ने उमराव जान फिल्म की ग़ज़ल चुनी,'दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए'।  आखरी पादान पर स्वरों की मल्लिका लता मंगेशकर ही थीं जिन्हें दीपशिखा ने संगीत का आठवां सुर करार देते हुए उनका गाना ‘हमारे दिल से ना जाना' सुनवाया और खुद लता जी के गीत ‘तेरी आँखो के सिवा दुनिया में रखा क्या है ‘ की भावपूर्ण प्रस्तुति की। 
 दीपशिखा ने कहा कि अमीरबाई कर्नाटकी, राजकुमारी, जोहराबाई अंबालेवाली और उमादेवी जिन्हे लोग टुनटुन के नाम से ज़्यादा जानते हैं , ने भी फिल्म गायन में उल्लेखनीय योगदान किया। समय सीमा के कारण वे इनके गीतों की प्रस्तुति न दे सकी। उनका कहना था कि इन सभी गायिकाओं ने भारतीय संगीत के संरक्षण और उसके विकास में अमूल्य योगदान किया है। इन सभी के काम पर और रिसर्च की आवश्यकता है ताकि इस बेशकीमती धरोहर को संजोया जा सके और युवा वर्ग उससे प्रेरित हो सके। डॉ दीपशिखा ने स्वयं महान गायक के एल सहगल के संगीत पर पी एचडी की है। वे अपने कार्यक्रमों में गायन के साथ संगीत की बारीकियां भी समझाती हैं।
  तीन घंटे की इस अनुपम प्रस्तुति की सभी ने दिल खोलकर प्रशंसा की और दीपशिखा को भरपूर आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का संचालन दूरदर्शन के पूर्व समाचार निदेशक अजीत सिंह ने किया। कार्यक्रम में पुराने संगीत के चाहने वाले लगभग 60 व्यक्ति नेट के जरिए शामिल हुए जिनमें हिसार के अलावा गुआहाटी, मुम्बई, त्रिवेंद्रम, बंगलुरू, गुरुग्राम, चंडीगढ़, लखनऊ, मैसूर, दिल्ली, फरीदाबाद, पुणे, कुरुक्षेत्र व अन्य शहरों के श्रोता शामिल थे। एक श्रोता ब्राज़ील से भी जुड़े थे।   कार्यक्रम का टेक्निकल पहलू प्रो सुरेश चोपड़ा ने संभाला।
   वानप्रस्थ के महासचिव प्रो जे के डांग ने सभी का धन्यवाद किया और बताया कि अगला मंगल कामना कार्यक्रम नववर्ष के पहले दिन आगामी शुक्रवार को 4 बजे से 6 बजे के बीच   होगा जिसमें सदस्य कठिन कोरोना काल के बावजूद अपने सुखद अनुभवों को सांझा करते हुए एक दूसरे का उत्साहवर्धन करेंगे और हर सदस्य कोई न कोई प्रस्तुति देगा। 

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